Complete Details of Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana - फसल बीमा योजना से किसानों को हुआ लाभ

Published Date - 12 September 2017 03:23:45 Updated Date - 25 October 2017 10:37:11

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना देश के किसानों के लिए क्रांतिकारी साबित हो रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13 जनवरी, 2016 को देश के किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का एक बड़ा तोहफा दिया था। किसान इसका ज्यादा से ज्यादा फायदा उठा रहे हैं। सरकार के मुताबिक प्रीमियम से अधिक राशि के दावों का भुगतान किसानों को किया गया है। पहले बीमा योजना में मुश्किल से पांच प्रतिशत किसान शामिल होते थे लेकिन आज इसके तहत 23 प्रतिशत किसान आते हैं, जो काफी उत्साहजनक है। इस योजना की आवंटन राशि को भी बढ़ाया गया है। 2015-16 में इसके लिए 3000 करोड़ रुपये आवंटित थे, जिसे 2017-18 में बढ़ाकर 9000 करोड़ रुपये कर दिया गया है। इसके साथ ही इस योजना में फसल क्षेत्र के दायरे का लक्ष्य 30 प्रतिशत से बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दिया गया रखा गया है।

किसान का एक सबसे बड़ा संकट है प्राकृतिक आपदा, जिसमें खेतों में की गई उसकी पूरी मेहनत बर्बाद हो जाती है। किसानों को फसल की सुरक्षा देने का एक ही उपाय है फसल बीमा योजना।

 क्या है यह योजना: योजना के अन्तर्गत किसानों को बीमा कम्पनियों द्वारा निश्चित, खरीफ की फसल के लिए 2 प्रतिशत प्रीमियम और रबी की फसल के लिए 1.5 प्रतिशत प्रीमियम का भुगतान करना होगा। 

 * योजना में सरकारी सब्सिडी पर कोई ऊपरी सीमा नहीं है। अर्थात बचा हुआ प्रीमियम 90 प्रतिशत होता है, तो ये सरकार द्वारा वहन किया जाएगा। 

* शेष प्रीमियम बीमा कंपनियों को सरकार द्वारा दिया जाएगा। ये राज्य तथा केंद्रीय सरकार में     बराबर- बराबर बाँटा जाएगा।

* योजना की प्रीमियम दर बेहद कम रखी गई है ताकि किसान इसकी किस्तें आसानी से वहन कर सकें।

* योजना किसानों के हित के लिए मनोवैज्ञानिक रूप से भी काम करेगी। 

* प्रधानमंत्री फसल योजना के अंतर्गत किसान सिर्फ मोबाइल के माध्यम से अपनी फसल के नुकसान के बारे में आंकलन कर सकता है। 

* लेकिन ध्यान रहे कि मनुष्य द्वारा निर्मित आपदाओं जैसे आग लगना, चोरी होना, सेंध लगना आदि इस योजना में शामिल नहीं है। 

क्या है प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना

  • प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में बेहद कम प्रीमियम पर किसानों की फसल का बीमा किया जाता है ताकि किसान इसकी किस्तें आसानी से वहन कर सकें। यह योजना ना सिर्फ खरीफ और रबी की फसलों को बल्कि वाणिज्यिक और बागवानी फसलों के लिए भी सुरक्षा प्रदान करती है।
  • खरीफ की फसल के लिए 2 प्रतिशत प्रीमियम और रबी की फसल के लिए 1.5 प्रतिशत प्रीमियम का भुगतान करना होता है। जबकि वार्षिक वाणिज्‍यिक एवं बागवानी फसलों के लिए पांच प्रतिशत प्रीमियम का भुगतान करना होता है।
  • कम प्रीमियम पर अधिकतम बीमा देने वाली प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की खासियत है कि इस योजना में सभी खाद्य फसलें, तिलहन, वार्षिक व्यावसायिक या साग सब्जी का बीमा होता है। पहले की योजनाओं में कुछ फसलें और तिलहन का ही बीमा होता था।
  • पहले किसानों को 50 फीसदी फसल नष्ट होने पर मुआवजा मिलता था अब महज 33 फीसदी फसल नष्ट होने पर ही फसल का बीमा मिलता है।
  • बीमित किसान यदि प्राकृतिक आपदा के कारण बोनी नहीं कर पाता तो यह जोखिम भी शामिल है और उसे दावा राशि मिल सकेगी।
  • ओला, जलभराव और लैण्ड स्लाइड जैसी आपदाओं को स्थानीय आपदा माना जाएगा। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में इसे स्थानीय हानि मानकर केवल प्रभावित किसानों का सर्वे कर उन्हें दावा राशि प्रदान की जाएगी। इस योजना में पोस्ट हार्वेस्ट नुकसान भी शामिल किया गया है। फसल कटने के 14 दिन तक यदि फसल खेत में है और उस दौरान कोई आपदा आ जाती है तो किसानों को दावा राशि प्राप्त हो सकेगी।

सरकार रख रही है किसानों का ध्यान
कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह का कहना है कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में फसल नुकसान की स्थिति में किसानों को पर्याप्त हर्जाना सुनिश्चित करने के साथ संगत फसल जोखिम प्रबंधन की व्यवस्था है। राधा मोहन सिंह ने कहा किसान समग्र जोखिम कवरेज के लिए नाम मात्र प्रीमियम चुका रहे हैं। सरकार ने किसानों के कल्याण और कृषि विकास के लिए कई योजनाएं शुरू की है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना हो या प्रधानमंत्री सिंचाई योजना इन योजनाओं के क्रियान्वयन से किसान और कृषि का विकास होगा। उनका कहना है कि आजादी के बाद पहली बार कृषि, किसान, गांव के लिये सबसे अधिक बजट प्रदान किया गया है और सरकार किसानों की आमदनी बढ़ाने की पहल कर रही है। इसमें पशुपालन, मधुमक्खी पालन, कुक्कुट पालन, मतस्य पालन को बढ़ावा दिया जा रहा है।

खाद की किल्लत दूर हो गयी
मोदी सरकार ने खाद की किल्लत दूर करने के लिए नीम कोटिंग यूरिया का प्रयोग शुरू किया। उसके बाद से खाद का उपयोग सिर्फ और सिर्फ खेती में होना सुनिश्चित हो गया। ऐसा होते ही खाद की कालाबाजारी रुक गयी। अब किसानों को समय पर पर्याप्त मात्रा में यूरिया मिलता है। खाद की कमी नहीं रहती। मोदी सरकार ने समस्या का ऐसा समाधान निकाला है कि किसानों के चेहरे खिल उठे हैं।

न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि
मोदी सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी कर किसानों को बड़ी राहत दी। 2016-17 की खरीफ फसल की दालों में अरहर के समर्थन मूल्य को 4,625 रुपये से बढ़ाकर 5,050 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया, उड़द के मूल्य को 4, 625 रुपये से बढ़ाकर 5,000 रुपये प्रति क्विंटल और मूंग के लिए 4,850 रुपये से बढ़ाकर 5,250 रुपये तक कर दिया गया है। बाकी फसलों का समर्थन मूल्य भी इसी तर्ज पर बढ़ा दिया गया। इससे किसानों की आमदनी में इतनी बढ़ोतरी हुई कि जीना आसान हो गया।

गन्ना किसानों के बकाये का भुगतान
गन्ना उत्पादक किसानों को सालों से उनका बकाया नहीं मिल रहा था। मोदी सरकार ने किसानों का भुगतान सुनिश्चित करने के लिए 4,305 करोड़ रुपये की वित्तीय मदद दी। इससे 32 लाख किसानों को फायदा हुआ। इस तरह से 2014-15 के 99.33 प्रतिशत और 2015-16 के 98.21 प्रतिशत किसानों को अपना बकाया रुपया वापस मिल चुका है। गन्ना किसानों के लिए मोदी सरकार वरदान बनकर आयी।

धान की खरीद में लेवी प्रणाली का खात्मा
धान की खरीद में लेवी प्रणाली खत्म कर मोदी सरकार ने किसानों को बड़ी राहत दी। अपनी उपज अब वे सीधे सरकारी केन्द्रों पर बेच सकते हैं। कोई बिचौलिया नहीं, जो उन्हें परेशान करे। धान की न सिर्फ कीमत अच्छी मिलने लगी है बल्कि कीमत की वसूली का रास्ता भी आसान हो गया है।

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना
हर खेत को पानी कभी बीजेपी का नारा हुआ करता था। मोदी सरकार ने इसे साकार कर दिखाया है। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत देश में 28.5 लाख हेक्टेयर खेत में पानी पहुंचाया गया है। 2016-17 में Per Drop More Crop की सूक्ष्म सिंचाई योजना के तहत 15.86 लाख हेक्टेयर खेतों को सिंचाई के अंतर्गत लाया गया। खेती में यह योजना किसानों के लिए मददगार साबित हो रही है।

मिट्टी की सेहत के लिए सॉइल हेल्थ कार्ड 
किस जमीन पर कौन सी फसल होगी, किस जमीन की उर्वरा शक्ति कैसी है इसकी जानकारी किसान को उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने सॉइल हेल्थ कार्ड शुरू किया। मोदी सरकार ने फसलों के अनुसार इस योजना शुरुआत की है। इसकी मदद से किसानों को पता चल जाता है कि उन्हें किस फसल के लिए कितना और किस क्वालिटी का खाद उपयोग करना है। फसल की उपज पर इसका सकारात्मक असर पड़ा है। अभी तक 6.5 करोड़ किसानों को सॉइल हेल्थ कार्ड दिये जा चुके हैं।

डिजिटल इंडिया की पहल-e-Nam
मोदी सरकार ने उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ किसानों को उपज की सही कीमत मिले, इस दिशा में भी कोशिश की है। e-Nam के रूप में देशव्यापी स्तर पर एक ऐसा ई-प्लैटफॉर्म तैयार किया गया है जिनसे किसानों के साथ देश की कृषि मंडियां आपस में जुड़ी हैं। यहां किसान अपनी उपज को बेच सकता है। ई-नाम पर 455 मंडियां जुडी हुई हैं। इससे किसानों के लिए बाजार की जरूरत पूरी हो गयी है।

कृषि मौसम विज्ञान सेवा की शुरुआत 
मौसम विज्ञान से किसानों को लाभ पहुंचाने की नीति मोदी सरकार ने शुरू की है। मौसम विज्ञान से मिलने वाली सीधी सूचनाओं से किसानों को बहुत फायदा हुआ है। मौसम के बारे में किसानों को एसएमएस से मिलने वाली सूचना से हर दिन के काम को सही ढंग से करने में बड़ी मदद मिलती है। 2014 में 70 लाख किसानों तक एसएमएस के माध्यम से ये सूचनाएं पहुंचती थीं, वहीं आज 2 करोड़ 10 लाख किसानों तक सूचनाएं पहुंच रहीं हैं।

किसानों के लिए शुरू हुआ किसान चैनल
पंडित दीन दयाल उपाध्याय ने मंत्र दिया- हर खेत को पानी और हर हाथ को काम। इसी अवधारणा को आगे बढ़ाते हुए माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने हल के पीछे चल रहे आदमी की सुध ली और देश को किसान चैनल की शुरुआत की। 26 मई 2015 को शुरू किया गया 24 घंटे का यह किसान चैनल कृषि तकनीक का प्रसार, पानी के संरक्षण और जैविक खेती जैसे विषयों की जानकारी देता है। इसमें किसानों को उत्पादन, वितरण, जोखिम, बचने के तरीके, खाद, बीज, वैज्ञानिक कृषि के बारे में पूरी जानकारी दी जाती है।

जैविक खेती पर जोर 
जैविक उत्पादों की बढ़ती हुई मांग को देखते हुए सरकार जैविक खेती के विकास के लिए काम कर रही है। 2015 से 2018 तक 10000 समूहों के अन्तर्गत 5 लाख एकड़ क्षेत्र को जैविक खेती के दायरे में लाया गया है। अब तक राज्य सरकारें 7186 समूहों के माध्यम से 3.59 लाख एकड़ भूमि को जौविक खेती के दायरे में ला चुकी हैं। देश के उत्तर पूर्वी राज्यों की भौगोलिक दशा को देखते हुए जैविक खेती पर विशेष बल दिया जा रहा है, जिसके लिए 2015 से 2018 तक 400 करोड़ की परियोजना चल रही है। 2015 -17 तक 143.13 करोड़ रुपये दिये जा चुके हैं जिनसे 2016-17 तक 1975 समूहों के माध्यम से 39,969 किसानों को जैविक खेती का काम कर रहे हैं।

किसानों के लिए ऋण सुविधा बढ़ी
खेती के लिए ऋण लेने की सुविधा बढ़ायी गयी है। अब 10 लाख करोड़ ऋण किसानों को उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसके साथ-साथ जिन राज्यों में किसानों की आर्थिक स्थिति खराब है और ऋण लौटाने में दिक्कत हो रही है वहां स्थानीय सरकार से बातचीत कर रास्ता निकालने की कोशिश बढ़ी है। यूपी जैसे राज्यों ने किसानों के लिए बड़े पैमाने पर ऋण माफ कर दिया है।

बीमा के हैं फायदे
इस योजना में बीमित होने पर फसल को प्राकृतिक आपदाओं की वजह से हुए नुकसान की क्षतिपूर्ति की जाती है. बुआर्इ का न हो पाना, बाढ़, चक्रवात, ओलावृष्टि, जलजमाव आदि सारे रिस्क कवर किये जाते हैं. यही नहीं, कटनी के बाद भी 14 दिनों तक फसल को आेलावृष्टि से हुए नुकसान को कवर किया जाता है.

ऐसे करा सकते हैं बीमा
बीमा कराने के लिए आपको अपना आधार एवं बैंक पासबुक की फोटोकॉपी देनी होगी. कागजात एवं प्रीमियम की राशि के साथ आपको अपने निकटतम पंचायत लैंप्स, पैक्स, बैंक, को-ऑपरेटिव बैंक, मुखिया, सीओ, बीडीओ से संपर्क कर सकते हैं. श्री तलवार योजना की मॉनीटरिंग के लिए अलग-अलग जगहों का खुद दौरा कर रहे हैं. कहते हैं कि इस काम में सरकारी अधिकारी व कर्मचारी तत्परता से जुटे हुए हैं. शेष दिनों में भी वे बेहतर परिणाम देंगे.

फॉर्म भरने के लिए क्या-क्या कागजात चाहिए ?

  • आवेदक का एक फोटो
  • किसान का आईडी कार्ड (पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, वोटर आईडी कार्ड, पासपोर्ट, आधार कार्ड)
  • किसान का एड्रेस प्रूफ (ड्राइविंग लाइसेंस, वोटर आईडी कार्ड, पासपोर्ट, आधार कार्ड)
  • अगर खेत आपका खुद का है तो खेत का खसरा नंबर / खाता नंबर का पेपर जरूर साथ लें।
  • खेत पर फसल बोई है, इसका प्रूफ। प्रूफ के तौर पर किसान पटवारी, सरपंच, प्रधान जैसे जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों से एक पत्र लिखवाकर जमा कर सकते हैं। हर राज्य में ये व्यवस्था अलग अलग है। नजदीकी बैंक जाकर इस बारे में ज्यादा जानकारी ले सकते हैं।
  • अगर खेत बटाई या किराए पर लेकर फसल बोई गई है, तो खेत के असली मालिक के साथ करार की कॉपी की फोटोकॉपी साथ जरूर लें। इसमें खेत का खरसा नंबर / खाता नंबर जरूर साफ तौर पर लिखा होना चाहिए।
  • अगर आप चाहते हैं कि फसल को नुकसान होने की स्थिति में पैसा सीधे आपके बैंक खाते में जाए, तो एक कैंसिल्ड चैक (Cancelled Cheque) भी लगाना जरूरी होगा।



प्रीमियम की राशि
औसत प्रीमियम की दर 10 से 20 प्रतिशत तक होती है. किसानों को दो प्रतिशत ही देना है. बाकी प्रीमियम झारखंड एवं भारत सरकार देगी. रांची के किसानों को एक हेक्टेयर पर 1,085 रुपये एवं एक एकड़ पर 439 रुपये धान के बीमा के लिए देना है.

कुछ अन्य खास बातें

  • फसल बोने के अधिकतम 10 दिनों के अंदर ही आपको प्रधानमंत्री बीमा फसल योजना (pradhan mantra fasal bima yojana) का फॉर्म भरना जरूरी हैं।
  • फसल कटाई से लेकर अगले 14 दिनों तक अगर आपकी फसल को प्राकृतिक आपदा के कारण नुकसान होता है, तो भी आप इस बीमा योजना का लाभ उठा सकते हैं।
  • इस योजना में आपको फसल खराब होने पर तभी बीमा की रकम मिल सकेगी जब आपकी फसल किसी भी प्राकृतिक आपदा के ही कारण खराब हुई हो। जैसे औला, जलभराव, बाढ़, तूफान, तूफानी बरसात, जमीन धंसना इत्यादि।
  • कपास की फसल का बीमा करवाने के लिए किसानों को प्रति एकड़ 62 रुपये प्रीमियम के रूप में जमा करवानी होगी। जबकि 505.86 रुपये के हिसाब से धान की फसल के लिए, रूपए 222.58 रुपये के
  • हिसाब से बाजरा के लिए तथा मक्का की फसल के लिए 202.34 रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से प्रीमियम जमा करवाना होगा।

2022  तक किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार किसानों की आय बढ़ाने के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। इसके तहत नई तकनीकों के उपयोग को बढ़ाने, फसल चक्र में परिवर्तन करने और कम लागत में खेती की जाए की जानकारी किसानों को दी जा रही है। सरकार ने लक्ष्य रखा है कि 2022 तक किसानों की आय को दोगुनी की जाए। इस संकल्प के साथ कई आधारभूत योजनाओं को जमीन पर उतारा गया है जो खेती-किसानी में सहायक सिद्ध हो रहा है।

 

 


bhan singh

27-01-2018

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