Published Date - 14 September 2017 01:29:14 Updated Date - 25 October 2017 10:24:42

Kishan Vikash Patra in Hindi(किसान विकास पत्र)

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा किसानो के हित में बनायी गयी किसान विकास पत्र केंद्र सरकार की एक योजना है। यह निवेश का दीर्घकालिक जरिया है। जिसका लाभ डाकघर से लिया जा सकता है। इसमें निवेश किया जाता है। इसमें न्यूनतम निवेश 100 रुपए तक किया जा सकता है।
इसकी परिपक्व समय अवधि आठ साल की होती है। इन आठ साल में डाकघर आपके निवेश पर 8.40 फीसदी का ब्याज लगाकर देता है। किसान विकास पत्र के तहत आपको अपना जम धन किसी अपने करीबी को ट्रांसफर करने की सुविधा होती है।

इसमें आसानी से निवेश हो सकेगा और कम आय वाले परिवारों को निवेश अच्छा मौका मिलेगा। इसमें आपका धन सौ महीने में दोगुना हो जाएगा। इसे नए रूप में लांच किया गया है, जिससे आप ढाई साल में रुपये वापस ले सकेंगे।
किसान विकास पत्र के तहत आपको अपना जम धन किसी अपने करीबी को ट्रांसफर करने की सुविधा है।

इस योजना से होने वाला लाभ :
आठ साल चार महीने में रक़म दोगुनी
निवेश की कोई सीमा नहीं
कम से कम 1000 रुपये का किसान विकास पत्र
किसान विकास पत्र 1000, 5000, 10,000 और 50,000 रुपये के मूल्य में उपलब्ध
100 महीने (आठ साल चार महीने) में दोगुना हो जाएगा
योजना के तहत सालाना 8.7 प्रतिशत का ब्याज
दूसरों को स्थानांतरण की भी सुविधा
इसके बाद 6-6 महीने में भुनाया जा सकता है
अभी सुविधा पोस्ट ऑफ़िस में, बाद में बैंक में भी उपलब्ध
शुरूआत में ये प्रमाणपत्र डाक घरों के जरिए बेचे जाएंगे लेकिन इसे जल्दी ही निवेशकों के लिए राष्ट्रीयकत बैंकों की नामित शाखाओं के जरिए निवेश के लिए उपलब्ध कराया जाएगा

इसका एक मकसद सरकार का ये भी रहेगा की देश में जो काला धन है उसको सफ़ेद किया जाये इसी वजह से नरेन्द्र मोदी जी सरकार ने इसको कुछ बदलाव के बाद दोबारा से चालू किया है

अनगिनत बार ट्रांसफर की सुविधा है इसके सर्टिफिकेट सिंगल या ज्वाइंट नामों से जारी किए जाएंगे। ये सर्टिफिकेट एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को अनगिनत बार ट्रांसफर किए जा सकेंगे। इसके अलावा, एक पोस्ट ऑफिस से देश में कहीं भी ट्रांसफर करने की सुविधा भी उपलब्ध होगी। इसके साथ नॉमिनेशन का विकल्प भी होगा। किसान विकास पत्र को गिरवी रख कर बैंकों से कर्ज भी लिया जा सकेगा। किसान विकास पत्र की खरीद पर केवाईसी नियम भी लागू होंगे।

निवेश में आसानी है इसमें केवीपी का एक फायदा यह भी है कि इसमें आसानी से निवेश किया जा सकता है। आप चाहें तो नकदी दे कर पोस्ट ऑफिसों से इसे खरीद सकते हैं। न इसके लिए बैंक खाते की जरूरत होगी और न ही चेक बुक की। एक फाइनेंशियल प्लानर के अनुसार, ऐसे लोग इनके प्रति आकर्षित हो सकते हैं, जो निवेश में झंझट नहीं चाहते

किसान विकास पत्र के तहत जमा किए गए आपके जमाधन पर जितना ब्याज लगता है उस ब्याज पर सरकार टैक्स वसूल करती है। किसान विकास पत्र में निवेश की कोई उच्चतम सीमा नहीं है और इसे 30 महीने की तय समयसीमा के बाद भुनाया जा सकता है। हालांकि बचतकर्ताओं को अपने निवेश पर कोई कर रियायत नहीं मिलेगी।

सरकार ने लोक भविष्य निधि (पीपीएफ) और डाकखानों के जरिए परिचालित किसान विकास पत्र जैसी अन्य लघु बचत योजनाओं पर ब्याज दर जनवरी-मार्च तिमाही में अपरिवर्तित रखने का सोमवार (2 जनवरी) को निर्णय किया। सरकार ने यह फैसला ऐसे समय किया है जबकि वाणिज्यिक बैंक ब्याज दरें घटा रहे हैं। सरकार ने लघु बचत योजनाओं की ब्याज दरों की तिमाही समीक्षा की नयी व्यवस्था पिछले साल अप्रैल से शुरू की है। वित्त मंत्रालय की अधिसूचना में कहा गया है कि पीपीएफ पर आठ प्रतिशत वार्षिक की मौजूदा ब्याज दर जनवरी-मार्च तिमाही में भी बनी रहेगी। पांच साल की परिपक्वता वाले राष्ट्रीय बचत पत्र (एनएससी) पर भी यही दर लागू होगी।

इसी प्रकार 112 महीनों की परिपक्वता वाले किसान विकास पत्र पर ब्याज दर 7.7 प्रतिशत वार्षिक पर अपरिवर्तित रखी गई है। सुकन्या समृद्धि खाता योजना पर 8.5 प्रतिशत और वरिष्ठ नागरिक बचत योजना (पांच वर्ष) पर 8.5 प्रतिशत वार्षिक की ब्याज दर में भी बदलाव नहीं किया गया है। पांच साल के आवर्ती जमाओं पर जनवरी-मार्च तिमाही में ब्याज दर 7.3 प्रतिशत पर बनी रहेगी। इस समय बचत खातों पर लोगों को चार प्रतिशत की दर से और एक से पांच वर्ष की मियाद वाली बैंक जमाओं पर 7-7.8 प्रतिशत का ब्याज चल रहा है।

 

किसानविकासपत्रनामक्यों ?

इसे शुरू करने के पीछे सरकार का आइडिया यह था कि इसके जरिए जो धन मिलेगा, उसका इस्तेमाल किसानों की भलाई से जुड़े प्रॉजेक्ट में किया जाएगा। यही कारण है कि इसका नाम किसान विकास पत्र रखा गया। इसमें इमोशनल टच भी है और वह यह कि इसमें इनवेस्टमेंट ‌करने वाले को इस बात का अहसास हो कि उसके धन का इस्तेमाल किसानों की भलाई के लिए किया जा रहा है।

क्याब्लैकमनीबनेगावाइट?

सरकार ने जिस तरह से इस बार किसान विकास पत्र को फिर से लॉन्च किया है, उसे देखते हुए तमाम लोग कह रहे हैं कि इससे ब्लैक मनी को सफेद बनाने की गुंजाइश छोड़ी गई है। दरअसल, इसमें निवेश करने वाले से ज्यादा पूछताछ नहीं की जाएगी। आमदनी के सोर्स के बारे में भी नहीं पूछा जाएगा। सबसे अहम यह है कि कोई जितना भी चाहे, इसमें निवेश कर सकता है। इसके अलावा, इनवेस्टमेंट के बाद जो किसान विकास पत्र का सर्टिफिकेट दिया जाएगा, उसमें नाम तक नहीं लिखा होगा। लॉक आन पीरियड के बाद कोई भी पोस्ट आफिस जाकर इसके एवज में पैसा ले सकता है। मतलब साफ है कि सरकार शुरुआत में कुछ समय तक इसके नियमों में ढील देना चाहती है, ताकि इसमें इनवेस्टमेंट तेज गति से हो, बाद में नियमों में बदलाव किया जा सकता है। एक्सपर्ट मानते हैं कि दरअसल सरकार ने काफी सोच विचार कर इसे लॉन्च किया है। जो ब्लैक मनी बाहर जा रही, इसकी मदद से उसे रोकना भी एक उद्देश्य हो सकता है।


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