प्रधानमंत्री कृषि सिचाई योजना ( Pradhanmantri krishi sinchai Yojna ) की पूरी जानकारी

Published Date - 12 September 2017 04:04:13 Updated Date - 25 October 2017 10:37:41

 

 हमारे देश में आधे से ज्यादा लोगो का रोजगार कृषि पर आधारित है। लेकिन उन्हें पानी की कमी की वजह से वहुत कठनाईयो का सामना करना पड़ता है पानी की कमी की बजह से उनकी फसले ठीक से नहीं हो पाती जिससे कि उन्हें काफी नुकसान होता है इसलिए हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने एक योजना की सरुअत की जिसका नाम प्रधान मंत्री कृषि सिचाई योजना रखा गया।

इस योजना की शरुआत सन 2015 में की इस योजना में सरकार ने 50 हजार करोड़ रुपये लगने की सोचा है देश में कुल 14.2 करोड़ हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि में से 65 प्रतिशत में सिंचाई के योग्य भूमि  नहीं है इसलिए सरकार चाहती है जो भूमि कृषि योग्य नहीं है उसे कृषि योग्य बनाया जाये ।

इस योजना में सरकार ने सोचा है कि हर साल 200 करोड़ रूपए राष्ट्रीय कृषि बाजार  में लगाए जाये, और सरकार ने इसे  अग्रि-टेक इंफ्रास्ट्रक्चर फण्ड (atif) नाम दिया ।

जब किसानों के खेतो में पानी की कमी होती है, और किसान अपनी खेती सही प्रकार से कर नहीं पाते हैं, तो प्रधानमंत्री जी ने हर मौसम में हर खेतो में पानी पहुँचाने की सुविधा के लिए कृषि सिंचाई योजना का आयोजन किया है. इस योजना के अंतर्गत तीन मंत्रालयों, नामतः जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा पुनरुद्धार मंत्रालय, ग्रामीण विकास मंत्रालय तथा कृषि मंत्रालय की विभिन्न जल संरक्षण, संचयन एवं भूमिजल संवर्धन तथा जल वितरण सम्बन्धित कार्यों को संयुक्त किया गया है।

इस योजना हेतु अगले पाँच वर्षो के लिए 50000 करोड़ रुपए दिए गए हैं. और इस वर्ष (2015-16) के लिये इस योजना में 5300 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। सभी राज्यों द्वारा धनराशि के उपयोग तथा उनकी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए वर्षवार उपयोग तथा कुल आवंटित धनराशि भी इस कार्यक्रम के लिये बढ़ाई जा सकती है जिससे कि हर खेत को पानी, अधिक फसल उत्पादन के साथ-साथ पूरे देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित हो जाए।

  • अबतक जो अनुमान लगाया गया है उसके हिसाब से 142 मिलियन हैक्टेयर भूमि है भारत में जिसमे से 45% भूमि है उसमे सिचाई योग्य भूमि है।  बाकि बची हुई भूमि को सिचाई योग्य बनाना अभी बाकि है ।
  • अब तक जो पता लगाया है उसमे से 6 लाख हैक्टेयर भूमि को सिचाई योग्य बनाने में काम चल रहा है  और 5 लाख हैक्टेयर भूमि को सिचाई योग्य बनाया जा चूका है ।
  • इस योजना का प्रमुख उद्देश्य यह है कि हर खेत को ठीक से पानी मिले।
  • जो भी पानी व्यर्थ जाता है उसे रोका जाये ।
  • इस योजना में इस बात पर ध्यान दिया गया की जो खेतो को पानी का प्रबंध खेत में ही किया जाये जिसे “हर खेत को पानी” नाम दिया गया।
  • हमारे देश में 65% खेतो के लिए भूमि है वो कृषि सिचाई योग्य नहीं है तो सर्कार ये चाहती है जो ये भूमि है इसमें भी पानी कि व्सवस्था कि जाये जिससे कि इसे कृषि योग्य बनाया जाये।

प्रधानमंत्री कृषि सिचाई योजना के प्रमुख उद्देश्य:-

 

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यरक्षता में मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति (सीसीईए) ने नई योजना प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (पीएमकेएसवाई) को मंजूरी दे दी है। इसमें पांच सालों (2015-16 से 2019-20) के लिए 50 हजार करोड़ रुपये की राशि का प्रावधान किया गया है। मौजूदा वित्तीय वर्ष के लिए 5300 करोड़ का आवंटित किए गए हैं। 

पीएमकेएसवाई का मुख्य उद्देश्य हैं - सिंचाई में निवेश में एकरूपता लाना, 'हर खेत हो पानी' के तहत कृषि योग्य क्षेत्र का विस्तार करने के लिए, खेतों में ही जल को इस्तेमाल करने की दक्षता को बढ़ाना ताकि पानी के अपव्यय को कम किया जा सके, सही सिंचाई और पानी को बचाने की तकनीक को अपनाना (हर बूंद अधिक फसल) आदि। इसके अलावा इसके जरिए सिंचाई में निवेश को आकर्षित करने का भी प्रयास किया जाएगा। 

राष्ट्रीय स्तर पर पीएमकेएसवाई योजना की निगरानी प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में सभी संबंधित मंत्रालयों के मंत्रियों के साथ एक अंतर मंत्रालयी राष्ट्रीय संचालन समिति (एनएससी) द्वारा की जाएगी। कार्यक्रम के कार्यान्वयन संसाधनों के आवंटन, अंतर मंत्रालयी समन्वय, निगरानी और प्रदर्शन के आकलन के लिए नीति आयोग के उपाध्यक्ष की अध्यक्षता में एक राष्ट्रीय कार्यकारी समिति (एनईसी) गठित की जाएगी। राज्य के स्तर पर योजना का कार्यान्वयन संबंधित राज्य के मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय मंजूरी देने वाली समिति (एसएलएससी) द्वारा किया जाएगा। इस समिति के पास परियोजना को मंजूरी देने और योजना की प्रगति की निगरानी करने का पूरा अधिकार होगा। कार्यक्रम को और बेहतर ढंग से लागू करने के लिए जिला स्तर पर जिला स्तरीय समिति भी होगी। 

योजना के तहत कृषि-जलवायु की दशाओं और पानी की उपलब्धता के आधार पर जिला और राज्य स्तरीय योजनाएं बनायी जाएंगी। देश में कुल 14.2 करोड़ हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि में से 65 प्रतिशत में सिंचाई सुविधा नहीं है। इस लिहाज से इस योजना का महत्व और बढ़ जाता है। इस योजना का उद्देश्य देश के हर खेत तक किसी न किसी माध्यम से सिंचाई सुविधा सुनिश्चित करना है ताकि ‘हर बूंद अधिक फसल’ ली जा सके। 

इस योजना के लिए मौजूदा वित्त वर्ष में 1000 करोड़ रुपये का बजटीय आवंटन किया गया है। इसके तहत हर खेत तक सिंचाई जल पहुंचाने के लिए योजनाएं बनाने व उनके कार्यान्वयन की प्रक्रिया में राज्यों को अधिक स्वायत्ता व धन के इस्तेमाल की लचीली सुविधा दी गयी है। इस योजना में केंद्र 75 प्रतिशत अनुदान देगा और 25 प्रतिशत खर्च राज्यों के जिम्मे होगा। पूर्वोत्तर क्षेत्र और पर्वतीय राज्यों में केंद्र का अनुदान 90 प्रतिशत तक होगा।

 

 


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