Soil Health Card Scheme in Hindi – सॉइल हेल्थ कार्ड स्कीम इन हिंदी

Published Date - 14 September 2017 01:47:43 Updated Date - 25 October 2017 10:24:05

किसानों को उनके खेतों की मिट्टी की सेहत से वाकिफ कराने के लिए सरकार ने सेंट्रल सॉइल हेल्थ कार्ड स्कीम को लॉन्च कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को राजस्थान के सूरतगढ़ में इस योजना का शुभारंभ किया। योजना के तहत किसानों को उनकी खेतों की मिट्टी के बारे में लैब में जांच करके बताया जाएगा।

इस मौके पर उन्होंने कहा कि कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए किसानों को मिट्टी की क्वॉलिटी के बारे में पता होना चाहिए। योजना के तहत किसानों को मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी या उनके अनुपात के बारे में बताया जाएगा। साथ ही किसानों को मिट्टी के अनुरूप फसल उगाने की सलाह दी जाएगी।

सरकार का इरादा कम से कम क्षेत्रफल में अधिक से अधिक पैदावार को बढ़ावा दोना है। कई राज्य इस योजना पर पहले से काम कर रहे हैं। गुजरात ने इस बाबत सबसे पहले शुरुआत की थी। केंद्र सरकार ने इस योजना के लिए फिलहाल तरीब 600 करोड़ रुपये का इंतजाम किया है।

मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना (soil health card scheme) मृदा स्वास्थ्य कार्ड किसी खेत विशेष की माटी यानी मृदा के पोषक तत्वों की स्थिति बताता है और उसकी उर्वरकता में सुधार के लिए जरूरी पोषक तत्वों की उचित मात्रा की सिफारिश किसानों को करता है। इससे किसानों को खेत की मिट्टी की प्रकृति की जानकारी भी मिलती है। किसान उसी के अनुसार खेत में उर्वरक और अन्य रसायन डाल सकता है ताकि लागत में कमी आए और उत्पादन बढ़े।

इस योजना  की शुरुआत 19 फरवरी 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सूरतगढ़, राजस्थान में की. इस योजना का उद्देश्य अगले तीन साल में 14 करोड़ से अधिक किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड उपलब्ध कराना है. यानी हर किसान को एक मृदा स्वास्थ्य कार्ड देना है.

इस महत्वाकांक्षी योजना की घोषणा 2014 में वित्तमंत्री अरूण जेटली ने बजट भाषण में की थी. बजट में कार्ड जारी करने के लिए 100 करोड़ रुपए तथा 100 मोबाइल मृदा परीक्षण प्रयोगशालाएं स्थापित करने के लिए 56 करोड़ रुपए आवंटित किए गए.

दरअसल इस कार्ड में किसी खेत विशेष की मृदा का ब्यौरा होगा. कि उसमें कौन कौन से पोषक तत्व किस किस मात्रा में है और उसमें बोई गई फसलों को किस मात्रा में कौनसा उर्वरक दिया जाना चाहिए. योजना को शुरू करते हुए मोदी ने इस मृदा संरक्षण व उन्नयन की दिशा में बड़ा कदम बताया. उन्होंने कहा कि अगर किसान इसे अपना लेते हैं तो वे प्रति तीन एकड़ कम से कम 50 हजार रुपए बचा सकेंगे. उन्होंने कहा कि खेती बाड़ी का तरीका मृदा की गुणवत्ता पर निर्भर होना चाहिए.

मोदी ने कहा कि इस योजना का ध्येय वाक्य ‘स्वस्थ धरा, खेत हरा’ है. इस योजना के तहत मिट्टी का परीक्षण कराया जाएगा और उसी के अनुसार आवश्यक वैज्ञानिक तौर तरीके अपनाकर मृदा के पोषण तत्वों की कमियों को दूर किया जाएगा. स्वस्थ धरा होगी, तभी खेत हरा होगा. समय की मांग है कि हम धरती मां की चिंता करें तभी धरती मां हमारी चिंता करेगी. ‘सुजलाम, सुफलाम’ का सपना भी तभी पूरा होगा.

उल्लेखनीय है कि इससे पहले तत्कालीन संप्रग सरकार ने मृदा स्वास्थ्य एवं उर्वरता प्रबंधन योजना शुरू की थी.

प्रदर्शन: योजना के पहले 2 वर्षीय चक्र (2015-17) में 31 मई 2017 तक 2.53 करोड़ लक्षित नमूने एकत्र किए गए और 93% नमूनों का परीक्षण किया गया। सरकारी जानकारी के अनुसार इस योजना के तहत राज्य  सरकारों ने लगभग 14 करोड़ हेल्थ कार्ड बनाए जा रहे हैं जिसमें सरकार ने बताया कि पांच जुलाई 2017 तक 9 करोड़ मृदा स्वास्थ्य कार्ड किसानों को वितरित किए गए हैं।

मृदा  हेल्थ  कार्ड  योजना (for Every Indian Farmer)

सोइल हेल्थ कार्ड किसानों के लिए एक बहुत ही फायदेमंद योजना है , भारत जैसे देश में ऐसे कई किसान है जो ज्यादा पढ़े – लिखे नहीं होते है वो ये भी नहीं जानते की अधिकतम फसल उत्पादन के लिए किस तरह की फसल को बिकसित करना चाहिए मूल रूप से वो अपने मिटटी के गुड़ और प्रकार नहीं जान पाते है , वे अपने ही अनुभव से फसलों का बढ़ना और फसलों का असफल होना जान सकते है। किन्तु वो ये नहीं समझ पाते की मिटटी की हालत कैसे सुधारा जा सकता है । इसके लिए इंडिया गवर्नमेंट ने एक सॉयल हेल्थ कार्ड स्कीम जारी किया है। जिसका नाम आप सभी जानतें ही होगें – Soil Health Card Yojana for Every Farmer.

इस स्कीम के तहत किसानों को सोइल हेल्थ कार्ड दिया जाता है, जिसमे किसानों की जोत मिटटी कैसी है उसके बारे में जानकारी दी जाती है उन्हें एक लिस्ट दी जाती है की उनकी जमीन में किस तरह की फसल लग सकती है । जिससे किसानों को अधिकतम लाभ मिले और उनकी मिटटी में क्या सुधार करने की जरुरत है, Soil Health Card एक रिपोर्ट कार्ड है जो की मिटटी के गुड़ के बारे में महत्वपूर्ण सूचना प्रदान करता है जैसे मिटटी के प्रकार के बारे में ,पोषक तत्व सामग्री , आवश्यक खाद ,फसल से लिए सही तापमान और वर्षा की हालत आदि।

मृदा  हेल्थ  कार्ड  योजना  की  मुख्य  बातें

मृदा हेल्थ कार्ड योजना की मुख्य बातें इस प्रकार है।

योजना का नाम – मृदा हेल्थ कार्ड योजना।
स्कीम का एरिया – मिटटी की जाँच करना।
स्कीम की तारीख – 17 Feb 2015।
योजना की शुरुआत – माननीय प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी के करकमलों द्वारा।
योजना की कुल बजट – 568 Cr.।

मृदा हेल्थ कार्ड योजना की फीचर

सोइल हेल्थ कार्ड की फीचर कुछ इस प्रकार है..।

सरकार इस स्कीम के तहत 14 करोड़ किसानों को इस स्कीम से शामिल करना चाहती है।
देश सभी भागों में ये स्कीम लागू की जाएगी।
सॉयल कार्ड के रूप में किसानों को एक रिपोर्ट दी जाएगी जिसमे उनके जमीन की मिटटी की पूरी जानकारी रहती है।
एक खेत के लिए Every 3 साल में एक सोशल कार्ड दिया जायेगा।

मृदा  हेल्थ  कार्ड  योजना  में  शामिल  कुछ  तक्थ

Soil Health Card Scheme के तहत मिटटी के नमूने की पूरी तरह से जाँच की जाएगी पूरी जानकारी हासिल करके के बाद ही रिपोर्ट कार्ड बनाया जाता है जो इस प्रकार है।

Health of Soil
Soil Working and Functional Features
मिटटी में अपनी और आवश्यक पोषक तत्व की मात्रा।
अगर मिटटी में अलग से गुड़ पाए जाते है तो रिपोर्ट कार्ड में अलग से उनकी सूची तैयार की जाती है।
कुछ सुधारात्मक उपाय करके, किसान अपनी की खामियों को सुधारने के लिए उपयोग कर सकेगा।


Pushpender Kumar

06-12-2017

Soil health card K liya apply kaise Karen

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